इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा लिखित एक प्रसिद्ध सामाजिक उपन्यास का पहला खंड है। कहानी एक वसीयतनामे के आस-पास घूमती है, जो पारिवारिक रिश्तों में उथल-पुथल मचा देता है। इसमें प्रेम, लालच, कर्तव्य और मानवीय कमजोरियों का अद्भुत चित्रण है। यह खंड मुख्य पात्रों, कृष्णकांत, गोविंदलाल और रोहिणी का परिचय कराता है और उस जटिल कहानी की नींव रखता है जो आगे चलकर एक दुखद मोड़ लेती है। यह पुस्तक पाठकों को उन्नीसवीं सदी के बंगाली समाज और मानवीय मनोविज्ञान की गहरी समझ प्रदान करती है, जो इसे एक क्लासिक रचना बनाती है।
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