इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह पुस्तक महाभारत के अठारह पर्वों में से चौदहवें पर्व, ‘आश्वमेधिक पर्व’ पर आधारित है। यह पर्व कुरुक्षेत्र युद्ध की समाप्ति के बाद की घटनाओं का वर्णन करता है। इसमें युधिष्ठिर द्वारा अपने पापों के प्रायश्चित और चक्रवर्ती सम्राट के रूप में अपनी स्थिति को स्थापित करने के लिए किए गए अश्वमेध यज्ञ का विस्तृत वृत्तांत है। यज्ञ के घोड़े की दिग्विजय यात्रा, अर्जुन और अन्य योद्धाओं के पराक्रम और यज्ञ के सफल समापन की कथा इस पर्व का मुख्य विषय है। इसमें श्रीकृष्ण और अर्जुन के बीच हुई ‘अनुगीता’ का भी समावेश है।
फ़ॉर्मेट बदलना
क्या आपको यह फ़ाइल किसी दूसरे फ़ॉर्मेट में चाहिए? इसके लिए आप iLovePDF का इस्तेमाल कर सकते हैं, जो एक बहुत अच्छा ऑनलाइन टूल है।
ई-रीडर पर भेजें
आप Amazon की “Send to Kindle” जैसी फ्री सर्विस का इस्तेमाल करके आसानी से फ़ाइल को अपने डिवाइस पर भेज सकते हैं।
कोई दिक्कत आ रही है?
चेक करें कि आपके ई-रीडर का सॉफ्टवेयर अपडेटेड है। यदि फ़ाइल खराब हो या न खुले, तो कृपया उसे पुनः डाउनलोड करें। फिर भी समस्या हो तो हमसे संपर्क करें।