इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह पुस्तक महाभारत के अठारह पर्वों में से पांचवें पर्व, ‘उद्योग पर्व’ पर केंद्रित है। ‘उद्योग’ का अर्थ है प्रयास या तैयारी। यह पर्व पांडवों के वनवास और अज्ञातवास की समाप्ति के बाद की घटनाओं का वर्णन करता है। इसमें शांति स्थापित करने के लिए किए गए अंतिम प्रयासों, जैसे कि भगवान कृष्ण का शांति दूत बनकर हस्तिनापुर जाना, और युद्ध की अनिवार्यता को देखते हुए दोनों पक्षों द्वारा की गई सैन्य तैयारियों का विस्तृत वर्णन है। यह पर्व कूटनीति, राजनीति और युद्ध की दहलीज पर खड़े पात्रों के मानसिक संघर्ष का एक गहन चित्रण प्रस्तुत करता है।
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