इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह महर्षि व्यास द्वारा रचित ‘महाभारत’ के अठारह पर्वों में से तीसरे, ‘वनपर्व’ पर केंद्रित एक संस्करण है। यह पर्व पांडवों के बारह वर्ष के वनवास की घटनाओं का विस्तृत वर्णन करता है। यह महाभारत के सबसे बड़े पर्वों में से एक है और इसमें कई प्रसिद्ध उपकथाएँ (जैसे नल-दमयंती, सावित्री-सत्यवान), तीर्थों का माहात्म्य, और युधिष्ठिर तथा विभिन्न ऋषियों के बीच हुए गहन दार्शनिक संवाद शामिल हैं।
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