इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
मीरालहरी’ भक्त-कవयित्री मीराबाई के पदों और भजनों से प्रेरित एक काव्यात्मक रचना या संकलन हो सकती है। ‘लहरी’ का अर्थ है तरंग, जो मीरा की कृष्ण-भक्ति की तरंगों का प्रतीक है। इस पुस्तक में या तो मीरा के मूल पद हो सकते हैं, या किसी अन्य कवि द्वारा मीरा के भक्ति-भाव को दर्शाती हुई नई कविताएँ हो सकती हैं। यह कृति पाठकों को भक्ति-रस में डुबो देती है और मीरा के अटूट प्रेम, उनके समर्पण और उनकी आध्यात्मिक विरह की पीड़ा का अनुभव कराती है। यह कृष्ण-भक्ति और काव्य के प्रेमियों के लिए एक आनंददायक पुस्तक है।
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