इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह यास्काचार्य द्वारा रचित ‘निरुक्त’ शास्त्र का दूसरा भाग है, जो छः वेदांगों में से एक है। निरुक्त, वैदिक शब्दों की व्युत्पत्ति और उनके अर्थ की व्याख्या करने वाला शास्त्र है। यह दुनिया का सबसे प्राचीन शब्द-व्युत्पत्ति शास्त्र माना जाता है। यह दूसरा भाग संभवतः निघण्टु (वैदिक शब्दों की सूची) के विशिष्ट अध्यायों की व्याख्या करता है, और वैदिक मंत्रों के गूढ़ अर्थ को समझने के लिए नियम प्रस्तुत करता है।
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