इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह प्रसिद्ध मार्क्सवादी आलोचक रामविलास शर्मा द्वारा लिखित महत्वपूर्ण निबंधों का संग्रह है। इस पुस्तक में शर्मा जी ‘प्रगति और परम्परा’ के बीच के द्वंद्वात्मक संबंध का विश्लेषण करते हैं। वे तर्क देते हैं कि सच्ची प्रगति परंपरा के अंधानुकरण या उसके पूर्ण त्याग में नहीं, बल्कि उसके प्रगतिशील तत्वों को आत्मसात करने और प्रतिगामी तत्वों को छोड़ने में निहित है। यह साहित्य और समाज को समझने की एक ऐतिहासिक और द्वंद्वात्मक दृष्टि प्रदान करती है।
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