इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह प्रसिद्ध मार्क्सवादी आलोचक रामविलास शर्मा द्वारा लिखित महत्वपूर्ण निबंधों का संग्रह है। इस पुस्तक में शर्मा जी ‘संस्कृति और साहित्य’ के बीच के द्वंद्वात्मक और गहरे संबंध का विश्लेषण करते हैं। वे तर्क देते हैं कि साहित्य अपनी सामाजिक और सांस्कृतिक जड़ों से ऊर्जा प्राप्त करता है और बदले में संस्कृति को प्रभावित और आकार भी देता है। यह कृति साहित्य को एक सामाजिक-सांस्कृतिक उत्पाद के रूप में देखने की एक प्रगतिशील दृष्टि प्रदान करती है।
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