इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह पुस्तक संस्कृत भाषा के व्याकरण के नियमों और संरचना का एक व्यवस्थित अध्ययन प्रस्तुत करती है। इसमें संज्ञा (शब्द-रूप), क्रिया (धातु-रूप), संधि, समास, कारक और वाक्य-रचना जैसे व्याकरण के सभी महत्वपूर्ण पहलुओं को शामिल किया गया है। यह पाणिनि की ‘अष्टाध्यायी’ या उस पर आधारित किसी परंपरा का अनुसरण कर सकती है। यह छात्रों, शोधकर्ताओं और संस्कृत भाषा में रुचि रखने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए एक मौलिक और अनिवार्य ग्रंथ है। एक मजबूत व्याकरणिक आधार के बिना संस्कृत साहित्य के विशाल भंडार को समझना असंभव है।
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