इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह जैन आध्यात्मिक कवि श्री ‘आनंदघन’ जी द्वारा रचित ‘चोविशी’ है। ‘चोविशी’ का अर्थ है चौबीस तीर्थंकरों की स्तुति में रचे गए चौबीस पद या भजन। आनंदघन जी अपनी रहस्यमय और गहन आध्यात्मिक अनुभूतियों के लिए जाने जाते हैं। उनकी यह कृति केवल तीर्थंकरों की पारंपरिक स्तुति नहीं है, बल्कि यह प्रत्येक तीर्थंकर के माध्यम से आत्मा के शुद्ध स्वरूप और आत्म-ज्ञान के मार्ग पर एक गहरा चिंतन है। यह जैन भक्ति-काव्य की एक शिखर कृति है।
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