इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह पुस्तक भक्तिकाल के महान कवि सूरदास के जीवन और उनके काव्य पर एक गहन और आलोचनात्मक ‘अध्ययन’ प्रस्तुत करती है। इसमें सूरदास की भक्ति-भावना, उनके द्वारा रचित ‘सूरसागर’ में वात्सल्य और श्रृंगार रस के अद्भुत चित्रण, और उनकी काव्य-कला का विस्तृत विश्लेषण किया गया है। यह कृति सूरदास को केवल एक भक्त कवि के रूप में नहीं, बल्कि एक महान कलाकार और दार्शनिक के रूप में स्थापित करने का प्रयास करती है, और हिंदी साहित्य में उनके अद्वितीय स्थान को रेखांकित करती है।
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