इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह रीतिकाल के महान कवि ‘बिहारी’ द्वारा रचित ‘सतसई’ (सात सौ दोहों का संग्रह) पर आधारित एक कृति है, संभवतः एक टीका या आलोचना। बिहारी की सतसई ‘गागर में सागर’ भरने के लिए प्रसिद्ध है, जिसमें प्रत्येक दोहे में श्रृंगार, नीति और भक्ति के गहरे भाव भरे हैं। यह पुस्तक इन गूढ़ दोहों के अर्थ को खोलती है, उनकी काव्य-कला, अलंकार योजना और भाव-सौंदर्य की विस्तृत व्याख्या करती है।
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