इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह चार वेदों में से एक, ‘अथर्ववेद’ का चौथा भाग है, जिसे श्रीपाद दामोदर सातवलेकर जी ने संपादित और अनूदित किया है। सातवलेकर जी ने वेदों को आम लोगों तक पहुँचाने के लिए महत्वपूर्ण कार्य किया। इस खंड में अथर्ववेद के मूल संस्कृत मंत्रों के साथ उनका सरल और सुबोध हिंदी अनुवाद और भाष्य दिया गया है। अथर्ववेद में लौकिक जीवन, आयुर्वेद, और ब्रह्मज्ञान से संबंधित मंत्र हैं, जो इसे अत्यंत महत्वपूर्ण बनाते हैं।
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