इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
गुणधराचार्य द्वारा रचित ‘कसाय पाहुडं’ (कषाय प्राभृत) जैन कर्म सिद्धांत पर एक मौलिक और गहन ग्रंथ है। यह विशेष रूप से आत्मा को बांधने वाले कषायों – क्रोध, मान, माया और लोभ – की विस्तृत विवेचना करता है। यह ग्रंथ इन कषायों की विभिन्न अवस्थाओं, उनके उदय और आत्मा पर उनके प्रभाव का सूक्ष्म विश्लेषण प्रस्तुत करता है। सातवां भाग इसी जटिल विषय की गहराई में उतरता है, जो जैन दर्शन के उन्नत अध्येताओं और साधकों के लिए महत्वपूर्ण है। यह कर्मों की प्रकृति को समझने और उनसे मुक्ति का मार्ग खोजने में मदद करता है।
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